अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद की बैठक में गूंजा शिक्षकों की समस्याओं का मुद्दा, आंदोलन की रणनीति तैयार
कोल्हापुर : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से संबद्ध महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद की दो दिवसीय राज्य कार्यकारिणी बैठक शिवाजी विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्र विभाग स्थित नीलांबरी सभागार में आयोजित की गई। बैठक में राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य, शिक्षकों की लंबित मांगों और भविष्य की संगठनात्मक रणनीति पर गहन मंथन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता परिषद के प्रांताध्यक्ष वेनुनाथ कडू ने की। इस अवसर पर विशेष समन्वयक के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अ.भा. सचिव (उच्च शिक्षा) व प्रांत अध्यक्ष प्रा. प्रदीप खेडकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में सरकार्यवाह राजकुमार बोनकिले, प्रांत कोषाध्यक्ष राजेंद्र सूर्यवंशी और प्रांत संगठन मंत्री किरण भावटणकर सहित राज्यभर के 35 प्रमुख पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
बैठक के दौरान राज्य के शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं और प्रशासनिक बाधाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की सेवा संबंधी विषयों और लंबित मांगों को लेकर अब ठोस कदम उठाने का समय आ गया है। परिषद ने आवश्यकतानुसार चरणबद्ध तरीके से राज्यव्यापी आंदोलन छेडने की रूपरेखा तैयार की है। आंदोलन के कानूनी पक्षों और संगठनात्मक समन्वय को लेकर भी कार्ययोजना निर्धारित की गई है।
प्रा. प्रदीप खेडकर ने राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए निर्णयों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि महासंघ के संकल्पों को महाराष्ट्र में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में शैक्षणिक गुणवत्ता वृद्धि और शिक्षकों के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया।
आगामी विधान परिषद चुनाव 2026 की पृष्ठभूमि में संगठन की भूमिका और रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। संगठन ने सदस्यता वृद्धि और विभागवार समीक्षा के माध्यम से जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने का संकल्प लिया। साथ ही, संगठनात्मक चुनावों को पारदर्शी और अनुशासित तरीके से संपन्न कराने के लिए समय-सारणी निर्धारित की गई है।
बैठक के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि यह सत्र संगठनात्मक दृष्टि से निर्णायक सिद्ध होगा। राज्य के शिक्षक प्रश्नों की प्रभावी प्रस्तुति के लिए सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए ‘अभ्यास वर्ग’ और प्रशिक्षक नियोजन के माध्यम से संगठन को और अधिक धार दी जाएगी।
